सामाजिक संस्था के रूप मे बाजार | बाजार | बाजार विनिमय| बाजार विनिमय की विशेषता | बाजार प्रणाली,
Class 12 sociology note in hindi
सामाजिक संस्था के रूप मे बाजार:-
संस्था शब्द का प्रयोग सबसे पहले स्पेंसर ने अपनी पुस्तक " first principal " में किया था, इनके अनुसार संस्था वह अंग है जिसके माध्यम से समाज के कार्यों को लागू किया जाता है,
बाजार :-
किसी भी प्रकार की विनिमय में बाजार सबसे मुख्य संस्था है यह एक ऐसी आर्थिक शक्ति है जो वस्तुओं की कीमत को तय करती है,
सीजविक के अनुसार:-
बाजार व्यक्तियों की समुह या समुदाय को कहते हैं जिसके बिच इस प्रकार के आपसी वाणिज्यिक संबंधों हो की प्रत्येक व्यक्ति को आसानी से इस बात का पूरा ज्ञान हो जाएगी दूसरे व्यक्ति समय-समय पर कुछ वस्तुओं और सेवाओं का विनिमय किस मूल्य पर करते हैं,
बाजार विनिमय :-
बाजार विनिमय की मुख्य विशेषता यह है कि वस्तुएं और सेवाएं रुपए में बेची और खरीदी जाती है बाजार विनिमय में आर्थिक विनिमय है,बाजार विनिमय की विशेषता :-
(1) :- खरीददार बेचने वाले के पास उससे अपनी आवश्यकता की चीजें खरीदने के लिए जाता है,(2 ) :- जब हम खरीदारी के लिए जाते हैं तो कम से कम मूल्य पर अधिक से अधिक खरीदना चाहते हैं यानि वस्तु विशेष का मूल्य मांग और पूर्ति के आधार पर घट बढ़ सकता है,
(3):- बाजार विनिमय मे वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य आपस में बातचीत के द्वारा तय कर लिया जाता है,
बाजार प्रणाली :-
जॉनसन ने बताया कि एक संस्था के रूप में बाजार एक सामाजिक प्राणी है,बाजार खरीदार और बेचने वाले की आर्थिक गतिविधियों का केंद्र होने के साथ ही उनके सामाजिक संबंधों को प्रभावित करता है, इससे जुड़े कुछ मुख्य तत्व :-
(A) :- विनिमय के लिए वस्तु :-
यह वस्तु भौतिक और अभौतिक दोनों तरह के हो सकती है, जैसे श्रम और कुशलता अभौतिक वस्तु है, जबकि व्यक्ति के दैनिक उपयोग में आने वाले वस्तुओं भौतिक होता है,
( B ) :- प्रतियोगिता :-
प्रतियोगिता बाजार का एक आवश्यक तत्व है क्योंकि इसी के द्वारा विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य तय होता है,
(C ) :-संविदा :-
संविदा एक ऐसा तरीका है जिसके द्वारा दो पक्षो के बीच विनिमय का रूप तय होता है
( D ) :- श्रम विभाजन :-
एक बाजार तभी व्यवस्थित बनता है, जब किसी वस्तु या सेवा से जुड़े विभिन्न कार्य उन लोगों में बांट दिए जाते हैं जिन्हें अपने अपने क्षेत्र के कार्य का विशेष ज्ञान होता है
(E):- लाभ और संपत्ति :-
जब व्यक्ति के अधिकार को मान्यता दी जाती है केवट तभी हम उस वस्तु को व्यक्ति की संपत्ति का तय है, संपाती हो आधार है जिसके द्वारा व्यक्ति अपनी आर्थिक स्थिति को बढ़ाकर बाजार में विभिन्न प्रकार के लाभ प्राप्त करता है,
(F):- व्यवसाय की अधिकता :-
जैसे-जैसे व्यवसाय की संख्या बढ़ती है बाजार के क्षेत्र भी बढ़ने लगती है,
