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bank ke kya kya karya hai, functions of commercial banks

Reserve Bank of India ke karya par ek note likhiye, | रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के कार्य पर एक नोट लिखिए, functions of commercial banks






केंद्रीय बैंक :-

हम जानते है की हमारे भारत के केंद्रीय बैंक ,भारतीय रिज़र्व बैंक है , जो कि भारत के सभी बैंकों का नियंत्रण करता है,

 भारत में जितने भी बैंक है वह सभी बैंक भारतीय रिजर्व बैंक के दिए गए आदेश के अनुसार ही कार्य करता है

 भारतीय रिजर्व बैंक का कार्य अन्य बैंकों को नियंत्रण करना तो है ही साथ ही अन्य और निम्नलिखित कार्य है जिन्हें हम विस्तार से पढ़ेंगे

 भारतीय रिजर्व बैंक के निम्नलिखित कार्य:-

1 :  नोट जारी करना, 
2 : सरकार का बैंक,
3 : बैंकों का बैंक,
4 :- साख नियंत्रण,  
5.विदेशी विनिमय का संरक्षण,
6.अंतिम ऋणदाता,


1 :  नोट जारी करना :-
 भारतीय रिजर्व बैंक के पास देश में नोटों को छापने का एक अधिकार प्राप्त है,

 उसके पास इस प्रणाली के तहत ₹1 के नोट को छोड़कर सभी प्रकार के नोट जारी करने का एकाधिकार है,  नोट को  जारी करने के लिए रिजर्व बैंक न्यूनतम रिजर्व प्रणाली को अपनाता है,

 इस प्रणाली के तहत 1957 से सोने और   विदेशी मुद्रा भंडार के रूप में एक 200 करोड़ रुपए रिजर्व रखता है,
जिसमें कम से कम 115 करोड रुपए सोने के रूप में तथा ₹85 करोड़  विदेशी मुद्रा के रूप में होनी चाहिए,



 2 : सरकार का बैंक :-
भारतीय रिजर्व बैंक का दूसरा महत्वपूर्ण कार्य भारतीय सरकार और राज्य सरकार के  एजेंट और सलाहकार के रूप में कार्य करना है,

 यह राज्य और केंद्र सरकार के सभी बैंकीग  कार्य करता है आर्थिक और मौद्रिक नीति से संबंधित मामलों पर सरकार का उपयोग सलाह देता है यह सरकार के सार्वजनिक ऋण का प्रबंध भी  करता है,



 3 : बैंकों का बैंक :-
 भारतीय रिजर्व बैंक अन्य वाणिज्यिक बैंकों के लिए उसी प्रकार कार्य करता है जिस प्रकार अन्य बैंक आमतौर पर अपने ग्राहकों के लिए कार्य करते हैं,

भारतीय रिजर्व देश के सभी बैंकों को  पैसा उधार देता है केंद्रीय बैंक बैंकों का बैंक होने की हैसियत से यह बैंकों का नियंत्रण करता है तथा उन्हें परामर्श देता  है कि अनुसूचित बैंकों को अपने जामा का एक निश्चित भाग रिजर्व बैंक के पास नकद कोष के रूप में जमा करना पड़ता है,



4 :- साख नियंत्रण :-
भारतीय रिजर्व बैंक वाणिज्यिक बैंकों के द्वारा उत्सर्जित को नियंत्रित करने की जिम्मेवारी देता है, 

 इस उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए यह देश में प्रभावी रूप से ऋण को नियंत्रित करने और विनिमय करने के लिए मात्रात्मक और गुणात्मक तकनीकों का व्यापक उपयोग करता है,

 जब भारतीय रिजर्व बैंक देखता है कि अर्थव्यवस्था में पर्याप्त धन की आपूर्ति है और  इससे देश की मुद्रास्फीति की स्थिति पैदा हो सकती है तो वह अपने कड़ी मौद्रिक नीति के माध्यम से बाजार के पैसे की आपूर्ति में कमी करता है, 

और जब अर्थव्यवस्था में धन की आपूर्ति में कमी हो जाती है तो वह बाजार में पैसा की आपूर्ति को बढ़ा देता है, 



  5.विदेशी विनिमय का संरक्षण :-
 केंद्रीय बैंक विदेशी विनिमय कोषों  के रूप में कार्य करता है यह कार्य केंद्रीय  बैंक को भुगतान से संबंधित कठिनाइयों को दूर करने तथा विदेशी विनिमय को संरक्षण करने का कार्य है


6.अंतिम ऋणदाता:- 
केंद्रीय बैंक अंतिम ऋण दाता के रूप में कार्य करता है जब किसी व्यापारिक बैंकों वित्तीय संकट के दौरान कहीं से भी ऋण प्राप्त नहीं होता है तो केंद्रीय बैंक से अंतिम सहारे के रुप मे ऋण का  मांग कर सकता है,

या

केंद्रीय बैंक  उस बैंक को आवश्यक  की आपूर्ति करता है जब किसी बैंक के पास धन ख़त्म हो जाता है, और
जब वह अन्य बैंक के पास ऋण लेने जाता है तो  कोई दूसरा बैंक उस बैंक को ऋण नहीं देना चाहता है। तब  रिज़र्व बैंक यह सुविधा बैंक के जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा करने के लिए, 

और बैंक को असफल होने से रोकने के लिए ऋण देता है  क्योंकि बैंक के पास धन ख़त्म  होने से अन्य बैंकों और संस्थाओं पर भी प्रभाव पड़ सकता है और इससे वित्तीय स्थिरता और अर्थव्यवस्था पर बहुत बड़ा प्रभाव  पड़ता है।




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