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👉पूर्ति की लोच को प्रभावित करने वाले तत्व || purti ko prabhavit karne wale karak

पूर्ति की लोच को प्रभावित करने वाले तत्व || purti ko prabhavit karne wale karak



नमस्कार

 आज मैं आपको पूर्ति को प्रभावित करने वाले तत्वों के बारे में बताने जा रहे हैं, पूर्ति  को प्रभावित करने वाले तत्वों को जानने से पहले आपको यह जानना आवश्यक है कि पूर्ति किसे कहते हैं

आइए सबसे पहले पढ़ते है की पूर्ति किसे कहते है फिर पूर्ति को प्रभावित करने वाले तत्वों के बारे में पड़ेंगे,

अगर आप मांग को प्रभावित करने वाले तत्व को बारे में पढ़ चुके हो तो आपको पूर्ति को प्रभावित करने वाले तत्वों को याद करने में कोई परेशानी नहीं होगी,

क्योंकि मांग को प्रभावित करने वाले तत्व और पूर्ति को प्रभावित करने वाले तत्व आपस में समान है, सिर्फ इन दोनों में मांग और पूर्ति का अंतर है


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पूर्ति किसे कहते है?




किसी वस्तु का पूर्ति से अभिप्राय उस वस्तु की मात्रा से है जो एक विक्रेता भिन्न-भिन्न संभव की कीमतों पर एक निश्चित समय में बेचने को तैयार होता है, पूर्ति कहलाता है

Fulfillment of an item refers to the quantity of the item that a seller is willing to sell at a given time at different possible prices, called supply.




पूर्ति का अभिप्राय :-

किसी वस्तु की पूर्ति से अभिप्राय उस वस्तु की मात्रा से है जो एक विक्रेता भिन भिन संभव  की कीमतों पर एक निश्चित समय में बेचने को तैयार रहता  है.





परिभाषा :-

थॉमस के अनुसार:-" वस्तु की पूर्ति वह मात्र है जो एक बार में निश्चित समय पर विभिन्न कीमतों पर बेचने के लिए प्रस्तुत की जाती है"





पूर्ति  को प्रभावित करने वाले तत्व :-



जब वस्तु का कीमत में वृद्धि होती है तो विक्रेता  की अधिक मात्रा  बेचने को तैयार होता है,  इसी प्रकार जब वस्तु की कीमत में कमी होती है

तो विक्रेता वस्तु की कम मात्रा में बेचने के लिए तैयार होता है इस संबंध में पूर्ति का नियम के नाम से भी जाना जाता है




1.वस्तु की मांग:-
जब उसकी मांग में वृद्धि हो तो विक्रेता वस्तु को अधिक मात्रा में बेचने को तैयार होते हैं,

 इसी प्रकार जब जिस वस्तु की जितनी मात्रा कम होती है तो उस वस्तु को कम मात्रा में बेचने को तैयार होती है


2..तकनीकी परिवर्तन :-
वस्तु के उत्पादन की तकनीकी परिवर्तन उत्पादन लागत को प्रभावित करती है

अतः तकनीकी उन्नति के कारण उत्पादन लागत में कमी होने से वस्तु की पूर्ति बढ़ेगी,

इसी  प्रकार तकनीकी पिछड़ेपन के कारण उत्पादन लागत में वृद्धि होगी जिससे पूर्ति में कमी आएगी



3..उत्पादन के साधनों की उपलब्धि एवं उनकी कीमत :-
वस्तु की पूर्ति उत्पत्ति के साधनों की उपलब्धि एवं उनकी कीमत को भी प्रभावित करते हैं,

यदि भूमि, श्रम, पूंजी आदि  आसानी से उपलब्ध हो  जाए तो  पूर्ति मे वृद्धि की  जा सकती है,

साथ ही यह भी आवश्यक है कि साधन  सस्ते  और उचित कीमत पर उपलब्ध हो |

क्योंकि उत्पादन कार्य बहुत खर्चे हो जाता है अतः आगम साधनों के मूल्य  में वृद्धि होने से पूर्ति में कम होती है,



4..उत्पादन शुल्क की दर में परिवर्तन :-
उत्पादन पर लगाए गए उत्पादन शुल्क में वृद्धि होने से उत्पादन लागत एवं सीमांत लागत में वृद्धि होती है,

जिससे पूर्ति  में कमी की जा सकती है इसी प्रकार उत्पाद शुल्क में वृद्धि से पूर्ति में कमी होती है जिससे पूर्ति  की रेखा अपनी बाई  और चली जाती है


5..प्रतीस्थापक वस्तुओं की कीमतों में परिवर्तन :-
यह भी पूर्ति को प्रभावित करता है जैसे किसी  किसान के पास 3 एकड़ जमीन है जिस पर वह गेहूं तथा धान की खेती करता है,

और  गेहूं का कीमत बढ़ जाए तो वह धान की कीमत के उत्पादन में कमी करेगा क्योंकि गेहूं की तुलना में धान का उत्पादन कम लाभदायक होगा,

इससे धान की पूर्ति में कमी होती है, इस प्रकार प्रतीस्थापक वस्तु के मूल्य में वृद्धि होने से पूर्ति  में कमी होती है

6..उत्पादन पैमाना :-
उत्तरण के पैमाना भी पूर्ति को प्रभावित करते हैं, यदि उत्पादन बड़े पैमाने पर हो रहा हो तो पूर्ति की कमी में आवश्यकतानुसार तेजी से वृद्धि की जा सकती है, यदि पैमाना छोटा हो तो शीघ्रता पूर्ति  नहीं की जा सकती है,


7..प्राकृतिक तत्व:-
कृषि पदार्थों की पूर्ति मुख्यता प्राकृतिक तत्व
पर निर्भर करती है, अच्छी वर्षा उपजाऊ जमीन अनुकूल जलवायु आदि  कृषि उत्पादन में वृद्धि कर पूर्ति को बढ़ा देते हैं,

दूसरी ओर सूखा, बाढ़, अति वर्षा इत्यादि से कृषि उत्पादन तथा पूर्ति में कमी होती है


8..कीमत में प्रतिशत परिवर्तन:-
उत्पादक एवं भविष्य में किसी वस्तु की कीमत में वृद्धि होने की आशा करते हैं तो वे प्रया बाजार से वस्तु को घटा लेते  हैं,

अथवा उनकी पूर्ति ना करके भविष्य में मुनाफे की आशा के संग्रहण करने लगते हैं इसके फलस्वरूप पूर्ति में कमी हो जाती है इसके विपरीत भविष्य में कीमत घटने की आशंका में पूर्ति  में वृद्धि  देखी जाती है

वस्तु की मांग:-जब वस्तु की मांग में वृद्धि होगी दो विक्रेताओं की अधिक मात्रा में बेचने को तैयार होते हैं इसी प्रकार जब-जब तू कितनी मात्रा कम होती है दोस्तों को कम मात्रा में बेचने को तैयार होता है






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