Type Here to Get Search Results !

पर्यावरण प्रदूषण पर एस्से

पर्यावरण प्रदूषण पर एस्से (paryavaran pradushan)


नमस्कार, आप सभी को ANSARISE वेबसाइट मे आने के लिए धन्यवाद 
पर्यावरण प्रदूषण पर एस्से, paryavaran pradushan, ansarise, ansa rise,  ansari
पर्यावरण प्रदुषण 


पर्यावरण प्रदूषण का अर्थ :-


पर्यावरण प्रदूषण:-
सबसे पहले तो पर्यावरण प्रदूषण को समझने से पहले आपको पर्यावरण क्या होता है यह जानना आवश्यक है, आइए समझते हैं,


पर्यावरण का अर्थ:-
पर्यावरण शब्द हिंदी शब्द के दो शब्दों से बना है
इन शब्दों में से पहला शब्द है परी
और दूसरा आवरण,

जिनमें से परी का अर्थ होता है  हमारे आसपास के क्षेत्र,  और आवरण का  अर्थ होता है घिराव,
अर्थात हमारे आसपास के किसी घिरे  संपूर्ण जगत को पर्यावरण कहते हैं,
 हम उठने से लेकर रात को सोते वक्ततक पर्यावरण से घिरे हुए होते हैं,


प्रदुषण क्या है  :-

प्रदूषण का अर्थ होता है प्रकृति के संतुलन दोष पैदा होना, ना तो शुद्ध वायु प्राप्त होना, ना तो शुद्ध  जल  प्राप्त होना, ना तो  खाद्य पदार्थ प्राप्त होना, अतः हमारे आस पास  सभी प्रदूषित हो जाये तो इसे पर्यावरण प्रदूषण कहते है, 

  प्रदूषण के कई प्रकार है,

जिनमें से प्रमुख वायु प्रदूषण,  ध्वनि प्रदूषण और जल प्रदूषण है, हम इन तीनो के बारे मे एक एक कर के चर्चा करेंगे,

पर्यावरण प्रदुषण के प्रकार :-

वायु प्रदूषण:-
वायु प्रदुषण का मतलब यह है की जब किसी कारणवश हमारे वायुमंडल में जलवाष्प और धूल वास्प  के अनुपात में परिवर्तन हो जाता है इस परिवर्तन को वायु प्रदुषण कहते हैं,




वायु प्रदूषण के प्रभाव को  रोकने के  कुछ महत्वपूर्ण कर्तव्य इस प्रकार है:-

** वायु प्रदूषण होने से मनुष्य की स्वास संबंधित बीमारी होने लगती है

** वायु प्रदूषण के कारण मनुष्य का मस्तिष्क पर पड़ता है और सोचने समझने की क्षमता खो देता है फिर  वह पागल बन जाता है

**वायु प्रदूषण के कारण अम्ल वर्षा होती है और अम्ल वर्षा होने पर ढेर सारी फसलें नष्ट हो जाती है

**वायु प्रदूषण के कारण ओजोन की परत पतली होने  लगती है जिसके  कारण पराबैगनी किरण प्रवेश कर जाती हैजब पराबैगनी किरण  धरातल पर प्रवेश करता है तो मानव के चर्म रोग होता है,




ध्वनि प्रदूषण:-
ध्वनि प्रदुषण, noise pollution, sound, sound pollution, ppollution

वातावरण में बहुत तेज आवाज से उत्पन्न होने वाले ध्वनि जैसे ( तेजी से गाना बजाना, तेजी से हॉर्न बजाना, जनरेटर की आवाज़,

  महासागर के लहर से उत्पन्न ध्वनि  इत्यादि से उत्पन्न ध्वनि जो की 30 hz से अधिक ध्वनि उत्पन्न करता है )  जिसे ध्वनि प्रदूषण करते हैं,



मृदा प्रदूषण:- 
मृदा प्रदूषण को भूमि प्रदूषण भी कहा जाता है मिट्टी या भूमि की रचना विभिन्न प्रकार के खनिज पदार्थ जय स्थानों के चूर्ण और जीवा समाधि के मिश्रण से होता है,

 इस विभिन्न पदार्थों के अनुपात में जब कुछ परिवर्तन होने लगता है तो इसे भूमि प्रदूषण करते हैं



जल प्रदूषण:-
अनेक भौतिक और मानवीय कारणों से जब जल मे  गंदे पदार्थों की मात्रा बढ़ने लगती है तब इसी  को हम जल प्रदूषण कहते हैं,

जब जल प्रदुषण होगा तो  जल मे रहने वाले जीव जंतु मरने लगते है, और प्राकृतिक संतुलन बिगड़ जायेगा,

क्योंकि  प्राकृतिक जितने भी जीव जंतु है सभी आपस मे एक दूसरे से जुड़े है ,

अतः  एक भी जीव या जंतु की कमी हो जाये तो प्रकृति संतुलन बिगड़ जायेगा




पर्यावरण प्रदूषण की समस्या और समाधान:- 


वाहनों का धुआँ :-
पर्यावरण को प्रदूषित करने में वाहन  से निकलने वाला धुंआ सबसे मुख्य कारण है,


कारखानो से उत्पन्न धुआँ :-
 पर्यावरण को प्रदूषित करने में कारखानो  से निकलने वाला धुंआ भी मुख्य कारण है,

 क्योंकि कारखानो से सबसे अधिक धुआँ उत्पन्न होता है और ये   पर्यावरण को सबसे अधिक प्रदूषित करता है,




उद्योग  के गंदगी का निकासी :-
भारत में औद्योगिक विकास पर्यावरण प्रदूषण का मुख्य कारण है ऐसे रासायनिक पदार्थ कारखानों के आसपास के क्षेत्र में फैले रहते हैं,

उन्हें किसी नदी में छोड़ दिया जाता है कारखानों के आसपास की नदियों का पानी जब मुख्य नदियों में मिलता  है तो सभी नदियां प्रदूषित हो जाती है,

जिनका पानी हजारों लोगों द्वारा उपयोग में लाया जाता है



नदियों में गंदे नालों की निकासी:-
संसार के मुख्य नगरों का विकास नदियों के किनारे इसलिए हुआ है नदियों को  एक जीवन  के रूप में देखा जाता है,



वनों का कटाव:-
पर्यावरण को स्वच्छ बनाने में पेड़ की मुख्य भूमिका होती है पेड़ में ऐसी क्षमता होती है कि वे पर्यावरण में उत्पन्न होने वाले प्रदूषण को एक बड़ी मात्रा में स्वयं ग्रहण कर लेते  हैं




पर्यावरण प्रदूषण के प्रभाव:- 

पर्यावरण प्रदूषण प्रभाव निम्न है जिसे हम एक एक कर के चर्चा करेंगे, जिनमे से पहला है की


घातक बीमारियों के वृद्धि :-
 पर्यावरण प्रदूषण से अनेक बीमारियां बढ़ रही है इनमें से अधिकांश बीमारी का संबंध सीधे पेट, आँख  और त्वचा रोग है,



मानसिक रोग:- 
औद्योगिक नगरों में मशीनों के बीच काम करने वाले मजदूरों में मानसिक रोग बढ़ रही है,

क्योंकि औद्योगिक से बहुत सारे धुआँ निकलता है और उस धुआँ से विभिन्न सारे रोग होते है,

अर्थात जब मनुष्य रोग होता है तो मन सही से काम नहीं करता है, जिन्हे मानसिक रोग कहते है




तापमान में वृद्धि:- 
तापमान में होने वाला कुल्फी परिवर्तन सामाजिक अनूप कुमार की नई समस्या उत्पन्न करता है

अगर जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं हुआ तो नाश्ता और मानव जाति की कार्यक्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा बल्कि अनेक बीमारियां भी उत्पन्न होगी





वन्य जीवो में कमी:-
विभिन्न प्रकार के वन्यजीव जंगलों की साफ  सफाई करने से मर रहे हैँ  और  बड़े उद्योग मनाए जा रहे हैं,

अतः वन्य जीवो को रहने के लिए जमीन और पेड़ नहीं मिल रहा है जिससे धीरे धीरे उन जीवो की मृत्यु हो रहे है, और वन्य जीवो में कमी की कम हो रहे हैँ,


















Visit this:-






आशा करता हु की आप को यह पोस्ट पसंद आयी होंगी ,साथ ही अच्छी तरह समझ आयी होंगी ,अगर कोई परेशानी हुई होंगी तो हमें कमैंट्स करें ,ताकि मैं आपकी परेशानी को दूर कर सकूँ ,

और हमारे वेबसाइट ANSARISE को सब्सक्राइब कर ,शेयर कर ,ताकि मैं मोटीवेट ,और आपके लिए ढेर सारे पोस्ट ले कर आयु , धन्यवाद

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ