बाजार क्या है, बाजार की मुख्य विशेषता क्या है और बाजार का वर्गीकरण के बारे मे, economic bazaar | market definition
नमस्कार,
इस मै बताऊंगा की बाजार क्या है, बाजार की मुख्य विशेषता क्या है और बाजार का वर्गीकरण के बारे मे, जिसके लिए आप को इस पोस्ट के अंतिम तक पढ़ना होगा,
साथ ही इकोनॉमिक्स मे मांग के नियम को भी आप को पढ़ना होगा, मांग को प्रभावित करने वाले तत्व, मांग के अपवाद, और माँग के मान्यता क्या होती है,
बाजार क्या है?
साधारण बोल चाल की भाषा मे, बाजार से हमारा मतलब ऐसे स्थान विशेष से होता है जहां पर व्यक्ति खरीदी बिक्री के एकत्रित होते हैं,
और वहा वस्तु का खरीद बिक्री करते हैं लेकिन अर्थशास्त्र में बाजार शब्द का प्रयोग एक व्यापक शब्द किया गया है,
अर्थशास्त्र में बाजार का मतलब किसी स्थान विशेष से नहीं होता है, वरन संपूर्ण क्षेत्र से होता है,
जिसमें किसी वस्तु के क्रेता और विक्रेता फैले हुए होते हैं, तथा वस्तु का खरीद बिक्री करते है, बाजार कहलाता है,
बाजार की मुख्य विशेषता :-
अभी तक आप ने बाजार के बारे मे जान चुके है की बज़ार क्या होता है, बाजार क्या होता है जानने के बाद आपको यह जानना है की बाजार की विशेषता क्या होता है,
वैसे तो बाजार की बहुत विशेषता है परन्तु उनमे से कुछ प्रमुख विशेषता निम्नलिखित है,
बाजार की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित है:-
1..एक वस्तु :-
बाजार में अर्थशास्त्रों के अनुसार अनेक वस्तुओं से नहीं लगाया गया है परंतु एक वस्तु से लगाया गया है !
उदाहरण :- सोने, चांदी, जुट इत्यादि.
2..क्षेत्र :-
अर्थव्यवस्था मे बाजार का मतलब किसी स्थान विशेष से नहीं होता है अपितु उस संपूर्ण क्षेत्र से होता है,
जिसमें किसी वस्तु की क्रेता एवं विक्रेता फैले हुए होते हैं, और क्रेता विक्रेता के बिच वस्तु का खरीद बिक्री हो,
इस प्रकार किसी वस्तु की बाजार निश्चित भौगोलिक क्षेत्र होता है, जो स्थानीय प्रांतीय राष्ट्रीय या अंतर्राष्ट्रीय हो सकता है, बाजार कहलाता है
3.. क्रेता और विक्रेता :-
जैसा कि आपको बाजार का नाम सुनते ही पता चलता होगा कि इनमें वस्तु का क्रय-विक्रय होता है, और ढेर सारे वस्तु उपलब्ध होते है, और उन वस्तु का क्रय विक्रय होता है,
अतः वस्तु का क्रय विक्रय करने के लिए क्रेता और विक्रेता का होना अत्यंत आवश्यक है.
जब किसी बाजार मे क्रेता और विक्रेता इन दोनों में से किसी एक की कमी हो जाये तो इसे बाजार नहीं कहा जा सकता है,
4..पूर्ण प्रतियोगित:-
किसी भी बाजार में क्रेता और विक्रेताओं के बीच में आपस में पूर्ण प्रतियोगिता होनी चाहिए,
क्योंकि पूर्ण प्रतियोगिता होने से वस्तु का अधिक खरीद बिक्री होता है
5..क्रेता विक्रेता के बिच व्यापारीक सम्बन्ध :-
बाजार के लिए क्रेता विक्रेता का होना अत्यंत जरुरी है लेकिन इनके बिच व्यापारीक सम्बन्ध होना चाहिए,
क्योंकि जब तक क्रेता और विक्रेता के बिच व्यापारीक सम्बन्ध नहीं होगा बाजार नहीं कहलायेगा,
6.. पूर्ण ज्ञान :-
किसी भी बाजार में क्रेता विक्रेता को बाजार के बारे में पूर्ण ज्ञान होने चाहिए, पूर्ण ज्ञान का मतलब यह नहीं की किताबी ज्ञान, बल्कि उसे बाजार के बारे मे पूर्ण ज्ञान होना चाहिए,
क्योकी जब तक पूर्ण ज्ञान नहीं होगा तब तक पूर्ण प्रतियोगिता नहीं होंगी, और बाजार का विशेष होता है की क्रेता और विक्रेता के बिच प्रतियोगिता रहे तभी बाजार कहलाता है,
7.. एक दाम :-
विभिन्न दुकानों में एक ही प्रकार के वास्तु का एक ही मूल्य होना चाहिए, जो की पूर्ण प्रतियोगिता के द्वारा संभव है,
बाजार का वर्गीकरण :-
बाजार का वर्गी करण तो अनेक सारे है परन्तु उनमे से कुछ महत्वपूर्ण निम्न दृष्टि से की गई है :-
1..:स्थान अथवा क्षेत्र के अनुसार.
2.: समय के अनुसार.
3..: कार्य के अनुसार.
4, : प्रतियोगिता अनुसार.
हम बाजार की वर्गीकरण पर चर्चा अगले पोस्ट पर करेंगे, अतः बाजार की वर्गी करण देखने के लिए आप हमारे चैनल ANSARISE को सब्सक्राइब कर दे,
आज के लिए इतना ही, और अधिक जानकारी के लिए आप निचे टेबल पर देख सकते हैँ,
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