नमस्कार,
आज मै इकोनॉमिक्स का नोट्स ले कर आया हूँ, ये नोट्स बहुत ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें मै इकोनॉमिक्स के एक एक पॉइंट क़ो कवर करता रहूँगा, इसलिए आप हमें फ़ॉलो कर ले।
पूर्ति किसे कहते है?
किसी वस्तु का पूर्ति से अभिप्राय उस वस्तु की मात्रा से है जो एक विक्रेता भिन्न-भिन्न संभव की कीमतों पर एक निश्चित समय में बेचने को तैयार होता है, पूर्ति कहलाता है
Fulfillment of an item refers to the quantity of the item that a seller is willing to sell at a given time at different possible prices, called supply.
पूर्ति का अभिप्राय :-
किसी वस्तु की पूर्ति से अभिप्राय उस वस्तु की मात्रा से है जो एक विक्रेता भिन भिन संभव की कीमतों पर एक निश्चित समय में बेचने को तैयार रहता है.
परिभाषा :-
थॉमस के अनुसार:-" वस्तु की पूर्ति वह मात्र है जो एक बार में निश्चित समय पर विभिन्न कीमतों पर बेचने के लिए प्रस्तुत की जाती है"
पूर्ति को प्रभावित करने वाले तत्व :-
जब वस्तु का कीमत में वृद्धि होती है तो विक्रेता की अधिक मात्रा बेचने को तैयार होता है, इसी प्रकार जब वस्तु की कीमत में कमी होती है
तो विक्रेता वस्तु की कम मात्रा में बेचने के लिए तैयार होता है इस संबंध में पूर्ति का नियम के नाम से भी जाना जाता है।
1.वस्तु की मांग:-
जब उसकी मांग में वृद्धि हो तो विक्रेता वस्तु को अधिक मात्रा में बेचने को तैयार होते हैं,
इसी प्रकार जब जिस वस्तु की जितनी मात्रा कम होती है तो उस वस्तु को कम मात्रा में बेचने को तैयार होती है।
2..तकनीकी परिवर्तन :-
वस्तु के उत्पादन की तकनीकी परिवर्तन उत्पादन लागत को प्रभावित करती है
अतः तकनीकी उन्नति के कारण उत्पादन लागत में कमी होने से वस्तु की पूर्ति बढ़ेगी,
इसी प्रकार तकनीकी पिछड़ेपन के कारण उत्पादन लागत में वृद्धि होगी जिससे पूर्ति में कमी आएगी।
3..उत्पादन के साधनों की उपलब्धि एवं उनकी कीमत :-
वस्तु की पूर्ति उत्पत्ति के साधनों की उपलब्धि एवं उनकी कीमत को भी प्रभावित करते हैं,
यदि भूमि, श्रम, पूंजी आदि आसानी से उपलब्ध हो जाए तो पूर्ति मे वृद्धि की जा सकती है,
साथ ही यह भी आवश्यक है कि साधन सस्ते और उचित कीमत पर उपलब्ध हो |
क्योंकि उत्पादन कार्य बहुत खर्चे हो जाता है अतः आगम साधनों के मूल्य में वृद्धि होने से पूर्ति में कम होती है।
4..उत्पादन शुल्क की दर में परिवर्तन :-
उत्पादन पर लगाए गए उत्पादन शुल्क में वृद्धि होने से उत्पादन लागत एवं सीमांत लागत में वृद्धि होती है,
जिससे पूर्ति में कमी की जा सकती है इसी प्रकार उत्पाद शुल्क में वृद्धि से पूर्ति में कमी होती है जिससे पूर्ति की रेखा अपनी बाई और चली जाती है।
5..प्रतीस्थापक वस्तुओं की कीमतों में परिवर्तन :-
यह भी पूर्ति को प्रभावित करता है जैसे किसी किसान के पास 3 एकड़ जमीन है जिस पर वह गेहूं तथा धान की खेती करता है,
और गेहूं का कीमत बढ़ जाए तो वह धान की कीमत के उत्पादन में कमी करेगा क्योंकि गेहूं की तुलना में धान का उत्पादन कम लाभदायक होगा,
इससे धान की पूर्ति में कमी होती है, इस प्रकार प्रतीस्थापक वस्तु के मूल्य में वृद्धि होने से पूर्ति में कमी होती है।
6..उत्पादन पैमाना :-
उत्तरण के पैमाना भी पूर्ति को प्रभावित करते हैं, यदि उत्पादन बड़े पैमाने पर हो रहा हो तो पूर्ति की कमी में आवश्यकतानुसार तेजी से वृद्धि की जा सकती है, यदि पैमाना छोटा हो तो शीघ्रता पूर्ति नहीं की जा सकती है।
7..प्राकृतिक तत्व:-
कृषि पदार्थों की पूर्ति मुख्यता प्राकृतिक तत्व
पर निर्भर करती है, अच्छी वर्षा उपजाऊ जमीन अनुकूल जलवायु आदि कृषि उत्पादन में वृद्धि कर पूर्ति को बढ़ा देते हैं,
दूसरी ओर सूखा, बाढ़, अति वर्षा इत्यादि से कृषि उत्पादन तथा पूर्ति में कमी होती है।
8..कीमत में प्रतिशत परिवर्तन:-
उत्पादक एवं भविष्य में किसी वस्तु की कीमत में वृद्धि होने की आशा करते हैं तो वे प्रया बाजार से वस्तु को घटा लेते हैं,
अथवा उनकी पूर्ति ना करके भविष्य में मुनाफे की आशा के संग्रहण करने लगते हैं इसके फलस्वरूप पूर्ति में कमी हो जाती है इसके विपरीत भविष्य में कीमत घटने की आशंका में पूर्ति में वृद्धि देखी जाती है
वस्तु की मांग:-जब वस्तु की मांग में वृद्धि होगी दो विक्रेताओं की अधिक मात्रा में बेचने को तैयार होते हैं इसी प्रकार जब-जब तू कितनी मात्रा कम होती है दोस्तों को कम मात्रा में बेचने को तैयार होता है
माँग का नियम क्या है?
मांग का नियम मूल्य एवं मांग के बीच के विपरीत संबंध को दर्शाता है अर्थात मूल्य घटने से मांग बढ़ती है तथा मूल्य में बढ़ने से मांग घटती है ,
अतः मांग का नियम या बताता है कि अन्य बातों के समान रहने पर कीमत में कमी के परिणाम स्वरुप वस्तु की मांगी जाने वाली मात्रा में वृद्धि होती है तथा कीमत में वृद्धि होने पर मांग कमी होती है,
मांग का नियम एक गुणात्मक कथन है मात्रातमक कथन नहीं है
यह केवल कीमत और माग के परिवर्तन की दिशा को बताता है परिवर्तन की मात्रा को नहीं।
माँग क़ो प्रभावित करने वाले तत्त्व कौन से हैँ
वैसे तो मांग को प्रभावित करने वाले अनेक तत्व है, जो की मांग को प्रभावित करते है, सबसे पहले मांग का नियम क्या है जानना जरुरी है
अर्थात प्रभावित का मतलब मूल्य बढ़ने या घटने पर माँग भी प्रभावित होता है
जिनमे से प्रमुख निम्नलिखित है :-
1..वस्तु का मूल्य :-
वस्तु और मूल्य मे गहरा और विपरीत संबंध होता है तथा माँग को प्रभावित करने वाला सबसे महत्वपूर्ण तत्व मूल्य ही है
अर्थात मूल्य के घटने से मांग में वृद्धि होती है तथा मूल्य मे वृद्धि होने से मांग में कमी होती है,
अतः जब मूल्य बढ़ता है तो माँग घटता है इसलिए मूल्य भी माँग को प्रभावित करता ह।
2..संबंधित वस्तुओं के मूल्य में परिवर्तन :-
किसी संबंधित वस्तुओं के मूल्य में परिवर्तन होने से उसकी मांग में प्रभावित होते हैं
सम्बंधित वस्तु भी दो प्रकार के होते हैं जिनमें से एक प्रतिस्थापक वस्तु होता है और दूसरा पूरक वस्तु ।
3.. आय में परिवर्तन :-
उपभोक्ता की आय में परिवर्तन का भी मांग पर प्रभाव पड़ता है यदि आय में वृद्धि होती तो उपभोक्ता किसी वस्तु की अधिक तथा किसी की कम मांग करता है
वस्तु के प्रकार :-
A.. सामान्य वस्तु
B.. घटिया वस्तु
A. सामान्य वस्तु:-
सामान्य वस्तु उस वस्तु को कहते है जब उपभोक्ता की आय में वृद्घि होने से जिन वस्तुओं की मांग बढ़ जाती है उसे सामान्य वस्तु करती है।
B. घटिया वस्तु:-
उपभोक्ता की आय में वृद्धि होने से जिन वस्तुओं की मांग में कमी हो जाती है एक घटिया वस्तु करते हैं।
4..रूचि एवं फैशन में परिवर्तन :-
रूचि एवं फैशन मे परिवर्तन भी माँग को प्रभावित करता है
जब कोई व्यक्ति को किसी वस्तु की चीज की रूचि होगा तो उसकी मांग बढ़ जाता है
ठीक इसी प्रकार नई फैशन की वस्तु जब बाजार में आती है तो पुरानी वस्तु की मांग घट जाती है।।
5.जलवायु तथा मौसम मे परिवर्तन :-
जलवायु तथा मौसम में भी परिवर्तन भी माँग को प्रभावित करता है
हमारे भारत देश में तीन प्रकार की जलवायु पाई जाती है जिनमें से पहला है वर्षा, दूसरा गर्मी, तीसरा है जाड़ा,
वर्षा के मौसम में छाता और बरसाती की मांग सबसे अधिक होती है
परंतु जब वर्षा का मौसम खत्म कर गर्मी आ जाए तो पुनः उसी वस्तु की मांग में कमी आ जाती है,
इसी प्रकार जब गर्मी में सूती वस्त्र की मांग अधिक होती है और ज्यादा में उसी वक्त की मांग घट जाती है।
6..जनसंख्या में परिवर्तन:-
जनसंख्या में परिवर्तन भी मां को प्रभावित करता है हमारे भारत देश में विभिन्न क्षेत्रों में भिन्न भिन्न जनसंख्या होती है
किसी क्षेत्र में कम किसी क्षेत्र में अधिक जनसंख्या होती है, जिस देश में जनसंख्या अधिक होता है
वह क्षेत्र में वस्तु की मांग अधिक होती है और जिस क्षेत्र में जनसंख्या कम हो तो उस क्षेत्र में वस्तु की मांग भी कम होती है।
7.. आय की वितरण में परिवर्तन:-
आय तथा वितरण में परिवर्तन भी मांग को प्रभावित करता है, भारत में आय वितरण दो प्रकार के पाई जाती है एक सामान्य वितरण तथा दूसरा असमान वितरण,
किसी क्षेत्र में आय का वितरण सामान हो तो उस क्षेत्र में वस्तु की मांग भी अधिक होगा,
परंतु जिस क्षेत्र में आय का वितरण आसमान हो तो उस क्षेत्र मे वस्तु का मांग भी घट जाएगा,
इसी प्रकार का वितरण भी मां को प्रभावित करता है।
8..व्यापारिक स्थिति में परिवर्तन, :-
व्यापारिक स्थिति को दो भागों में बांटा गया है,
एक मंदी और दूसरा वृद्धि
यदि किसी व्यापारी का व्यापार तेजी से चलेगा तो उसके पास आय आएगी,
अब आय आने वस्तु की मांग बढ़ जाएगी इसी के अपोजिट जब आय में कमी होगी तो वस्तु की मांग भी कम हो जाएगी
घटिआ कहा जा सकता है,
अतः व्यापारी स्थिति में परिवर्तन भी मां को प्रभावित करता है।
9.. समय में परिवर्तन, :-
समय में परिवर्तन भी माँग को प्रभावित करता है
समय को दो भागों में बांटा गया है
जिनमें से पहला है अल्प कालीन और दूसरा है दीर्घ कालीन,
अगर फैशन कीमत तथा रूचि में परिवर्तन होने से अल्प कालीन समय वाली हो तो की मांग घट जाती है
तथा दीर्घ कालीन में वृद्धि हो जाती है।
10.. अनुमान में परिवर्तन:-
अनुमान में परिवर्तन की मांग को प्रभावित करता है यदि किसी वस्तु का मूल्य वर्तमान के अपेक्षा भविष्य में कम होने की संभावना हो तो
उस वस्तु का मांग वर्तमान में कम हो जाएगा पुनः वर्तमान मे उसी वस्तु का मूल्य बढ़ने की संभावना हो तो उस वस्तु की माँग का वर्तमान में बढ़ जाएगा।
11..आविष्कार :-
आविष्कार भी माँग को प्रभावित करता है जब कोई नई वस्तु की आविष्कार होता है
और वह अच्छी हो तो उस वस्तु की मांग बढ़ जाती है तथा पुरानी वस्तु की मांग घट जाती है अतः अविष्कार भी माँग को प्रभावित करता है।
12..विज्ञापन:-
विज्ञापन का मुख्य उद्देश्य होता है कि ग्राहकों को अपनी ओर आकर्षित करना, कोई भी व्यक्ति कोई भी वस्तु की तभी खरीदारी करता है,
जब उस वस्तु की विज्ञापन अधिक हो, और विज्ञापन वही लोग करता है जिसके पास धन या पैसा अधिक होता है तो वह विज्ञापन करता है
और आप विज्ञापन करने से उस वस्तु की मांग बढ़ जाती है, और जो व्यक्ति विज्ञापन नहीं करता उस वस्तु के पास उस वस्तु की मांग घट जात,
अतः यह कहा जाये के विज्ञापन भी मांग को प्रभावित करता है।
मांग के नियम की मान्यताएं या सीमाएं निम्नलिखित है ( mang ke niyam ki manyata kya hai )
माँग के नियम की मान्यताएं सीमाएं को याद करने के लिए आपको ज्यादा परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा,
क्योंकि मांग के नियम की मान्यताएं सीमाएं, माँग को प्रभावित करने वाले तत्व के समान है, उनके समान ही नहीं बल्कि पूरा वही है ,
अर्थात आपको माँग के नियम की मान्यताएं याद करने के लिए माँग को प्रभावित करने वाले तत्व को भी याद करना पड़ेगा,
माँग को प्रभावित करने वाले तत्वों को याद करने के लिए आप हमारे चैनल को सब्सक्राइब करें।
1: उपभोक्ता की आय में परिवर्तन नहीं होना चाहिए:-
माँग के नियम को लागू होने के लिए आवश्यक है कि उपभोक्ता की आय में परिवर्तन नहीं होना चाहिए,
क्योंकि अगर उपभोक्ता की आय में परिवर्तन होगा तो मांग का नियम लागू नहीं हुआ, आइये उदहारण से समझते है,
जैसे अगर किसी व्यक्ति का आय ₹1000 है तो उस वस्तु का मांग में भी वृद्धि होती है और वह वस्तु की दाम में कमी होने का इंतजार नहीं करेगा,
और अगर किसी व्यक्ति का आय कम है तो वस्तु के दाम में कमी होने पर भी नहीं खरीद पाएगा।
2 : उपभोक्ता के आदत, रूचि एवं फैशन में परिवर्तन नहीं होना चाहिए:-
अगर उपभोक्ता को किसी चीज आदत होती है तो वस्तु की मांग बढ़ जाती है परंतु इन सभी की परिवर्तन हो जाने से मांग का नियम लागू नहीं होगा,
मांग के नियम को लागू होने के लिए उपभोक्ता की आदत होती एवं फैशन में परिवर्तन नहीं होना चाहिए,
उदाहरण:- यदि बाजार में नई फैशन में किसी वस्तु जैसे मोबाइल आ जाए तो व्यक्ति उस वस्तु की मांग करेगा,
क्यों ना उसकी दाम मे वृद्धि कर दें तथा पुरानी वस्तु के दाम में कमी करने पर भी उस वस्तु की मांग में कमी हो जाएगी.
अतः यह कहां जा सकता है कि उपभोक्ता की आदत रुचि फैशन में परिवर्तन होने से मांग का नियम लागू नहीं होगा।
3: मौसम में परिवर्तन नहीं होना चाहिए,:-
माँग का नियम को लागू होने के लिए मौसम में परिवर्तन नहीं होना चाहिए जैसे अगर भीषण गर्मी के मौसम में ऊनी वस्त्रों का दाम में कमी कर देने पर भी उसकी मांग में वृद्धि नहीं होगी,
इसी प्रकार इन जाड़े के मौसम में मोटी कपड़ो की दर में कमी होने पर भी उसकी मांग में वृद्धि होगी,
4:स्थानापन्न वस्तु के कीमत में परिवर्तन नहीं होना चाहिए :-
मांग का नियम को लागू होने के लिए स्थानापन्न वस्तु के कीमत में परिवर्तन नहीं होना चाहिए
स्थानापन्न वस्तु में कॉपी और चाय आती है, जब कॉफी का दाम ₹50 और चाय के दाम ₹40 है तो कॉपी की दाम 50 से घटकर 40 हो जाए
और उसके स्थानापन्न वस्तु घटकर 40 से घटकर 15 हो जाए तो व्यक्ति कॉफी की मांग ना करके चाय की माँग गौरी करेगा क्योंकि कॉफी की तुलना मे चाय का दाम कम है,
5: जनसंख्या में परिवर्तन नहीं होना चाहिए :-
मांग का नियम को लागू होने के लिए जनसंख्या में परिवर्तन नहीं होना चाहिए जैसे अगर किसी क्षेत्र में जनसंख्या में लगातार परिवर्तन हो रही हो
तो उस स्थिति में वस्तु का मूल्य में वृद्धि होने पर उस वस्तु की मांग में वृद्धि होगी परंतु इसके विपरीत अगर जनसंख्या में कमी हो जाए तो
उसकी उसकी दाम में कमी होने पर भी उसकी मांग में वृद्धि नहीं होगी
6: धन के वितरण में परिवर्तन नहीं होना चाहिए:-
मांग का नियम को लागू होने के लिए धन के वितरण में परिवर्तन नहीं होना चाहिए,
जैसे अगर किसी क्षेत्र में धन में परिवर्तन कर दिया जाए तो उस क्षेत्र के आय में भी परिवर्तन हो जाएगा आए में परिवर्तन होने से मांग का नियम लागू नहीं होता है
7: किसी नई प्रति स्थानापन्न वस्तुओं का उत्पादन नहीं होना चाहिए:-
हम पहने ही पति आस्था पोगोस्टमों के बारे में पूर्ण रूप से चर्चा कर चुकी है अगर आप रतिया उठाता घोस्ट हो क्या होती है नहीं जानते हो तो आप हमारे पोस्ट पर जाकर देख सकते हैं पोस्ट पर जाने के लिए आपको
हमारे वेबसाइट के होम पेज पर जाना होगा खोपरे पर जाने के बाद मेनू ऑप्शन में जाकर इकोनॉमिस्ट को टच करना होगा जा अब इकोनॉमिक्स का क्वेश्चन पा सकते हैं
मां का नियम को लागू होने के लिए यह आवश्यक है कि किसी नहीं प्रति आस्था प को स्टोर का उत्पादन नहीं होना चाहिए,
अगर किसी नहीं पति होता पार्क वस्तुओं का उत्पादन हो जाए तो मांग का नियम लागू नहीं होता है
देसी फोटो प्रतियां स्थापक उसके जैसी एक स्मार्ट पेन और और एक घटिया पेन है,
और स्मार्ट पेन का दाम ₹40 टोटल खटिया पेन का दाम ₹50 है, और दोनों पिंकी दिखावटी एक जैसी है एक जैसी काम करती है,
एक समय बाद दोनों पेन का दाम में कमी कर दिया जाए तो परवीन और स्मार्ट पेन को एक खरीदेंगे क्योंकि उसका मुंडे कम है।
माँग के नियम के अपवाद ( mang ke niyam ke apvad):-
मांग के नियम के कुछ अपवाद है जिनके होने पर माँग के नियम लागू नहीं होता है
अतः कुछ विशेष परिस्थितियों में एवं माँग मे सीधा संबंध पाया जाता है अतः मूल्य में घटने पर मांग भी घटती है
मूल्य के बढ़ने पर भी मांग घटने के बजाय और और बढ़ जाती है ऐसी अवस्था में माँग की रेखा निचे की ओर दाहिनी तरफ ना जाकर ऊपर दाहिनी ओर जाती है।
माँग के नियम के अपवाद निम्नलिखित है :-
1. भविष्य में मूल्य परिवर्तन की आशंका:-
यदि उपभोक्ता को यह आशंका हो जाती है कि भविष्य में कीमतों में परिवर्तन हो सकती है वह अपने माँग मे भी परिवर्तन कर देता है,
अगर भविष्य में कीमतें बढ़ने की आशंका हो तो की वर्तमान मे उपभोक्ता मांग अधिक कर देगा और अगर कमी होने की आशंका हो तो वह वर्तमान में मांग कम कर देगा,
अतः इस पर भी मांग का नियम लागू नहीं करेगा।
2. जीवन के लिए अनिवार्य वस्तुओं के संबंध में :-
मनुष्य के लिए अनिवार्य वस्तु भोजन, वस्त्र, मकान, शिक्षा और स्वास्थ्य है,
यदि इन सभी का कीमत में वृद्धि हो जाए तो फिर किन वस्तुओं का उपयोग करना बंद नहीं करेगा
अतः इसकी मांग में कमी नहीं हो सकता इसीलिए जीवन के लिए अनिवार्य वस्तु मे माँग का नियम लागू होती है।
3. बहुमूल्य वस्तुओं के संबंध में:-
बहुमूल्य वस्तु में सोना, चांदी, हीरा, मोती इत्यादि आती है इन वस्तुओं की कीमत जितना अधिक होगा उतना ही अधिक मांग होगी,
तथा इसकी कीमत में कमी हो जाए तो इस वस्तु की मांग में भी कमी आ जाएगी इस प्रकार की वस्तुओं में कीमत में वृद्धि होने के साथ-साथ माँग मे भी वृद्धि हो जाती है
और कीमत में कमी होने के साथ-साथ मांग कमी हो जाती है अतः इस प्रकार के वस्तु में मांग का नियम लागू नहीं होगा।
4. शादी विवाह के संबंध में:-
यदि किसी घर में शादी है और उन्हें शादी के लिए सामानों की आवश्यकता होगी परंतु अचानक उन सभी के दामों में वृद्धि हो जाए तो पर भी उन सभी वस्तुओं की मांग में कमी नहीं करेगा,
इसी प्रकार त्यौहारों के अवसर में अगर दीपावली के दिन दीपक जलाने वाले तेल की कीमत मे वृद्धि हो जाए तो दीपक जलाला बंद नहीं करेंगे,
अतः इन पर भी मां के नियम लागू नहीं होगा।
5.आदत के वस्तु के संबंध में:-
यदि किसी व्यक्ति को शराब पीने की आदत है तो उस समय उसकी मांग अधिक होगी,
अतः जब शराब के मूल्य में वृद्घि कर दिए तो शराब पीना बंद नहीं करेगा,
अतः उसकी मांग में कमी नहीं होगी,
इसीलिए इस पर भी मांग का नियम लागू नहीं होगा।
6.पूरक वस्तु के संबंध में :-
पूरक वस्तु के संबंध में भी मांग के नियम लागू नहीं होगा क्योंकि पूरक वस्तु मे कार और पेट्रोल है
अगर इनमें से एक पेट्रोल की दाम वृद्ध हो जाये और उसके पूरक वस्तु कार को खरीदना बंद नहीं करेंगे , अतः माँग का नियम लागू नहीं होगा,
7. विज्ञापन का प्रभाव:-
कभी-कभी उत्पादक अत्यधिक विज्ञापन द्वारा उपभोक्ता को इस प्रकार अपनी और आकर्षित करता है की
उसकी कीमत में वृद्धि होने पर भी उसकी मांग में कमी नहीं होती आता है उस पर भी मांग का नियम लागू नहीं होगा,
8. उपभोक्ता की अज्ञानता :-
यदि किसी क्षेत्र के लोग अज्ञानी है और जब वह सामान खरीदने दुकान जाता है और दुकानदार उन वस्तुओं के दाम में वृद्धी कर देता है
पर भी वह व्यक्ति उस सामान को खरीद के आएगा तो यह कहा जा सकता है कि उपभोक्ता की अज्ञानता भी मांग के नियम को लागू नहीं करेगा,
9. महामारी के समय:-
महामारी मे तो बहुत सारे आते है पर हम उन सभी मे से एक को ले कर चलते है जिनमे से एक है मुर्गा,
यदि मुर्गियों की बीमारी चिकन फॉक्स आ जाए और उस वक्त मुर्गियों के दाम में वृद्धि करने पर तो उसकी मांग में कमी आएगी ही
परंतु जब उनकी दाम में कमी कर देती तो उसकी मांग में वृद्धि नहीं करेंगे,इस पर भी मांग का नियम लागू नहीं होगा,
मांग की रेखा नीचे दाहिने की ओर झुकने के निम्न कारण है :-
1:-सीमांत उपयोगिता ह्रास नियम :-
वास्तव में मांग (demand) का नियम सीमांत उपयोगिता ह्रास नियम है इस नियम के अनुसार जैसे-जैसे उपभोक्ता किसी वस्तु की अधिक उपभोग करता है तब प्रत्येक अगली से इकाई को खरीदने के लिए उपभोक्ता पहले से कम कीमत देने के लिए तैयार होगा इसीलिए वस्तुओं की अधिक मात्रा तभी खरीदी जाती है जब वस्तु की कीमत कम होंगी.
2:- प्रतिस्थापन नियम या सम-सीमांत उपयोगिता नियम:-
इस नियम के अनुसार उपभोक्ता अधिकतम संतुष्टि प्राप्त करने के लिए अपने सिमित आय (income ) को वस्तुओं पर इस प्रकार खर्च करता है कि एक वस्तु की सीमांत उपयोगिता तथा मूल्य का अनुपात के बराबर हो जाए,
प्रतिस्थापन वस्तु पर प्रभाव से अभिप्राय है कि जब एक वस्तु अपने प्रतिस्थापन वस्तु की तुलना में सस्ती हो जाती है तो उसकी दूसरी वस्तु के लिए प्रतिस्थापन किया जाता है.
3 :- आय का प्रभाव :-
आय का प्रभाव उसे कहते हैं जब कोई व्यक्ति वस्तु का कीमत अधिक हो तो व्यक्ति की आय में कमी होती है और आय में कमी होने की परिणाम स्वरूप व्यक्ति की मांग में भी कमी होती है इसके विपरीत जब वस्तु का कीमत में कमी हो तो व्यक्ति की आय में वृद्धि होती है और आय में वृद्धि होने से वस्तु की मांग में वृद्धि होती है.
4:- वस्तु का बिभिन्न प्रयोग :-
वस्तु का विभिन्न प्रयोग से अभिप्राय यह है कि जब किसी वस्तु का कीमत में वृद्धि होगी तो उस वस्तु की मांग (demand) में कमी आ जाएगी, इसके विपरीत जब वस्तु का कीमत में कमी आएगी तो वस्तु की मांग (demand) मे वृद्धि ( increase ) हो जाएगी.
5:- क्रेटा की संख्या में वृद्धि या कमी:-
यदि किसी वस्तु का कीमत (price) पहले से अधिक हो तो उस वस्तु की मांग में कमी होती है तथा जब कीमत में कमी होती है तो वस्तु की मांग ( demand) मे वृद्घि होती है इस प्रकार मूल्य में कमी होने के परिणाम स्वरुप उनकी क्रेताओं की संख्या में वृद्धि या कमी होती है.
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बाजार क्या है?
साधारण बोल चाल की भाषा मे, बाजार से हमारा मतलब ऐसे स्थान विशेष से होता है जहां पर व्यक्ति खरीदी बिक्री के एकत्रित होते हैं,
और वहा वस्तु का खरीद बिक्री करते हैं लेकिन अर्थशास्त्र में बाजार शब्द का प्रयोग एक व्यापक शब्द किया गया है,
अर्थशास्त्र में बाजार का मतलब किसी स्थान विशेष से नहीं होता है, वरन संपूर्ण क्षेत्र से होता है,
जिसमें किसी वस्तु के क्रेता और विक्रेता फैले हुए होते हैं, तथा वस्तु का खरीद बिक्री करते है, बाजार कहलाता है,
बाजार की मुख्य विशेषता :-
अभी तक आप ने बाजार के बारे मे जान चुके है की बज़ार क्या होता है, बाजार क्या होता है जानने के बाद आपको यह जानना है की बाजार की विशेषता क्या होता है,
वैसे तो बाजार की बहुत विशेषता है परन्तु उनमे से कुछ प्रमुख विशेषता निम्नलिखित है,
बाजार की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित है:-
1..एक वस्तु :-
बाजार में अर्थशास्त्रों के अनुसार अनेक वस्तुओं से नहीं लगाया गया है परंतु एक वस्तु से लगाया गया है !
उदाहरण :- सोने, चांदी, जुट इत्यादि.
2..क्षेत्र :-
अर्थव्यवस्था मे बाजार का मतलब किसी स्थान विशेष से नहीं होता है अपितु उस संपूर्ण क्षेत्र से होता है,
जिसमें किसी वस्तु की क्रेता एवं विक्रेता फैले हुए होते हैं, और क्रेता विक्रेता के बिच वस्तु का खरीद बिक्री हो,
इस प्रकार किसी वस्तु की बाजार निश्चित भौगोलिक क्षेत्र होता है, जो स्थानीय प्रांतीय राष्ट्रीय या अंतर्राष्ट्रीय हो सकता है, बाजार कहलाता है
3.. क्रेता और विक्रेता :-
जैसा कि आपको बाजार का नाम सुनते ही पता चलता होगा कि इनमें वस्तु का क्रय-विक्रय होता है, और ढेर सारे वस्तु उपलब्ध होते है, और उन वस्तु का क्रय विक्रय होता है,
अतः वस्तु का क्रय विक्रय करने के लिए क्रेता और विक्रेता का होना अत्यंत आवश्यक है.
जब किसी बाजार मे क्रेता और विक्रेता इन दोनों में से किसी एक की कमी हो जाये तो इसे बाजार नहीं कहा जा सकता है,
4..पूर्ण प्रतियोगित:-
किसी भी बाजार में क्रेता और विक्रेताओं के बीच में आपस में पूर्ण प्रतियोगिता होनी चाहिए,
क्योंकि पूर्ण प्रतियोगिता होने से वस्तु का अधिक खरीद बिक्री होता है
5..क्रेता विक्रेता के बिच व्यापारीक सम्बन्ध :-
बाजार के लिए क्रेता विक्रेता का होना अत्यंत जरुरी है लेकिन इनके बिच व्यापारीक सम्बन्ध होना चाहिए,
क्योंकि जब तक क्रेता और विक्रेता के बिच व्यापारीक सम्बन्ध नहीं होगा बाजार नहीं कहलायेगा,
6.. पूर्ण ज्ञान :-
किसी भी बाजार में क्रेता विक्रेता को बाजार के बारे में पूर्ण ज्ञान होने चाहिए, पूर्ण ज्ञान का मतलब यह नहीं की किताबी ज्ञान, बल्कि उसे बाजार के बारे मे पूर्ण ज्ञान होना चाहिए,
क्योकी जब तक पूर्ण ज्ञान नहीं होगा तब तक पूर्ण प्रतियोगिता नहीं होंगी, और बाजार का विशेष होता है की क्रेता और विक्रेता के बिच प्रतियोगिता रहे तभी बाजार कहलाता है,
7.. एक दाम :-
विभिन्न दुकानों में एक ही प्रकार के वास्तु का एक ही मूल्य होना चाहिए, जो की पूर्ण प्रतियोगिता के द्वारा संभव है,
बाजार का वर्गीकरण :-
बाजार का वर्गी करण तो अनेक सारे है परन्तु उनमे से कुछ महत्वपूर्ण निम्न दृष्टि से की गई है :-
1..:स्थान अथवा क्षेत्र के अनुसार.
2.: समय के अनुसार.
3..: कार्य के अनुसार.
4, : प्रतियोगिता अनुसार.
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